जनकपुरधाम, ९ साओन: मधेश प्रदेश सरकारद्वारा गठित जनलोकपाल आयोग आर्थिक वर्ष २०८२/८३मे १५ टा मुद्दा फैसला कएने अइछ। स्थापना कालसँ न्यून जनशक्ति, भौतिक संरचनाक अभाव सहित समस्या झेलैत आएल आयोग आव २०८२/८३मे अनियमितता तथा भ्रष्टाचार सम्बन्धी ५१ उजुरी दर्ता मध्ये १५ टा फैसला कएने अइछ।
आयोगक सूचना अधिकारी प्रसन्नराज कर्ण अनुसार एत दर्ता भेल उजुरीसभक अध्ययन आ खोजबिनमे १५ टा फैसला करैत मुद्दा दर्ताक लेल अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग, केन्द्रीय कार्यालय टङ्गाल काठमाण्डू पठाएल गेल अइछ। दोसर उजुरीपर खोजबिन भ रहल ओ बतौलैन।
आव २०८१/८२मे भ्रष्टाचार आ अनियमितता सम्बन्धी ५६ उजुरीमे १० टा फैसला कएने छल।
आयोगमे सबसँ बेसी स्थानीय तह आ प्रदेश सरकारक निकायसभमे भ्रष्टाचार, अवैध सम्पत्ति आर्जन, प्रशासनिक अनियमितता सम्बन्धी उजुरी आइब रहल सूचना अधिकारी कर्णके कहब छैन। हुनक अनुसार अनलाइन मार्फत सेहो आयोगमे उजुरी दर्ता होइत अइछ।
२०७८ भादबमे स्थापना भेल आयोगमे सालेसाल अनियमितता तथा भ्रष्टाचार सम्बन्धी उजुरी बढ़ैत गेलोपर कार्यालयक लेल भौतिक संरचनाक अभाव, सुरक्षाकर्मी संगेक जनशक्ति अभाव सहित कारणसँ उजुरीक अध्ययन आ खोजबिन करए लेल समस्या भ रहल आयोगक अध्यक्ष रामसहायराय यादव जानकारी देलैन।
प्रदेशका धनुषा, महोत्तरी, रौतहट सहित जिलामे स्थानीय तहसँ सञ्चालित विकासीय योजनामे भ्रष्टाचार होएबला तथा नियुक्ति प्रक्रियामे अनियमितता लगायत विषयमे बेसी उजुरी दर्ता भेल अध्यक्ष यादव जानकारी देलैन।
“आयोगमे ३३ गोटे कर्मचारीक दरबन्दी छै, मुदा अखन कार्यालय प्रमुख सङे १५ कर्मचारी कार्यरत छैथ”, आयोगक अध्यक्ष यादव कहलैन, “एक दिस उजुरी बेसी आइब रहल छै तँ दोसर दिस कर्मचारी अभावक कारण दर्ता भेल उजुरी अध्ययन करए लेल समस्या भ रहल अइछ।”
नियमावली आ कर्मचारी पठाबय लेल बेर-बेर प्रदेश सरकारकेँ पत्राचार कएलोपर अखनधैर सुनुवाइ नै भेल हुनकर बतौलैन। “मुद्दाके अनुसन्धान करए लेल कानुनके कर्मचारी चाही, छापामारी करए लेल प्रहरी चाही । अखन हमरासभके कानुनमे विज्ञता हासिल कएल कर्मचारी आ प्रहरीक अभाव छै। तइँ काज करए लेल सकस भ रहल अइछ।”, अध्यक्ष यादव कहलैन ।
नागरिकक अधिकारकेँ सुनिश्चिता, आर्थिक सुशासन कायम करबाक उद्देश्यसँ गठित ओइ आयोगक अध्यक्षमे यादव, सदस्यमे सुजाता विमल आ सञ्जीव झा छैथ।





